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डोरियों का कंपन, तनी हुई डोरी के अनुप्रस्थ कंपन के नियम (Speed of Transverse Waves in Stretched String or Wire)

डोरियों का कंपन (VIBRATION OF STRINGS):

डोरी का अर्थ किसी धातु का तार या किसी पदार्थ की डोरी या धागा (cord) होता है जो पूर्णतः लचीला (flexible) तथा एकसमान अनुप्रस्थ -काट (uniform cross-section) का हो तथा जिसकी लंबाई उसकी मोटाई की तुलना में बहुत अधिक हो। यह दो सिरों के बीच खिंची रहती है। डोरियों में अनुदैर्घ्य (longitudinal) तथा अनुप्रस्थ (transverse) दोनों प्रकार के कंपन उत्पन्न किए जा सकते हैं।

डोरी की लंबाई के अनुदिश (along) शमाय चमड़े (chamois leather) के टुकड़े से रगड़कर उसमें अनुदैर्घ्य कंपन उत्पन्न किए जा सकते हैं। तनी हुई डोरी पर धनु (bow) चलाकर या उसकी लंबाई के लंबवत दिशा में ऊँगली से कर्षित (pluck) कर उसमें अनुप्रस्थ कंपन उत्पन्न किए जा सकते हैं और उस बिंदु के दोनों ओर डोरी की लंबाई के अनुदिश अनुप्रस्थ तरंगें चलने लगती हैं। ये तरंगें डोरी पर एक निश्चित चाल से चलती हैं। इस चाल का मान निम्नलिखित सूत्र से दिया जाता है।

                                                   V = √T / µ

जहाँ T डोरी का तनाव तथा µ डोरी की प्रति एकांक लंबाई का द्रव्यमान (mass per unit length) [जिसे रैखिक द्रव्यमान घनत्व (linear mass density ) भी कहते हैं।] हैं।

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तनी हुई डोरी या तार में अनुप्रस्थ तरंगों की चाल (Speed of Transverse Waves in Stretched String or Wire):

जब तनी हुई डोरी या तार को लंबाई के लंबवत धनु (bow) चलाकर या एक ओर खींचकर छोड़ दिया जाता है तो उसमें अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती है। यह तरंग डोरी पर एक निश्चित चाल से चलती है। इस चाल का मान v, डोरी के तनाव (tension) T तथा उसके रैखिक द्रव्यमान घनत्व (linear mass density) µ पर निर्भर करता है।

मान लिया कि डोरी पर तरंग की चाल v , राशियाँ T^a तथा µ^b के समानुपाती हैं। अतः,

                                                        v ∝ T^aµ^b

                                                       v = kT^aµ^b

या जहाँ, k एक विमारहित नियतांक है

स्वरक, स्वर अधिस्वरक तथा संनादी (Tone, Note Overtone and Harmonics):

मात्र एकल (only one) आवृत्ति की ध्वनि तरंग को स्वरक या टोन (tone) कहा जाता है। कोई भी वाद्य-यंत्र मात्र एकल आवृत्ति का स्वरक (tone) कदापि उत्पन्न नहीं कर सकता है। किसी ध्वनि स्रोत से उत्पादित स्वरक (tone) हमेशा अनेक स्वरक से मिलकर बना होता है।

जब किसी वाद्य यंत्र को बजाया जाता है तब उसके द्वारा (सिद्धांततः) अनंत संख्या में स्वरक (tone) उत्पन्न होते हैं जिनमें मूल स्वरक के सम अथवा विषम (अथवा दोनों) गुणज वर्तमान रहते हैं। मूल (fundamental) स्वर के अतिरिक्त स्वरों की आवृत्तियों को अधिस्वरक (overtone) कहा जाता है।

अधिस्वरकों की उपस्थिति के कारण तरंग के स्वरूप (waveform) में थोड़ा परिवर्तन हो जाता है। अधिक संख्या में अधिस्वरकों की उपस्थिति के कारण तरंगस्वरूप की आकृति मृदु होती है, जिसके कारण स्वर की गुणता (quality) बेहतर हो जाती है। यदि उच्चस्वरक (uppertones) या अधिस्वरक (overtones) की आवृत्ति मूल स्वरक की आवृत्ति के पूर्ण गुणज हों, तो उन्हें संनादी (harmonic) कहा जाता है। इसके विपरीत यदि अधिस्वरक की आवृत्ति मूल स्वरक की आवृत्ति की, पूर्ण गुणज नहीं हो, तो उन्हें बेसुरा या कर्णकटु कहा जाता है।

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तनी हुई डोरी के अनुप्रस्थ कंपन के नियम (Laws of Transverse Vibration of Stretched String):

तनी हुई डोरी या तार के अनुप्रस्थ कंपन के निम्नलिखित नियम हैं।

(i) लंबाई का नियम (Law of length) –

तनी हुई डोरी के कंपन की आवृत्ति (v), डोरी की लंबाई (I) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यदि डोरी पर तनाव (T) और डोरी की प्रति एकांक लंबाई का द्रव्यमान (µ) नियत हों, अर्थात v ∝ 1 / l , जब T तथा µ नियत हैं।

(ii) तनाव का नियम (Law of tension) –

तनी हुई डोरी के कंपन की आवृत्ति (v), डोरी के तनाव (T) के वर्गमूल के समानुपाती होती है, यदि डोरी की लंबाई (l) और डोरी की प्रति एकांक लंबाई का द्रव्यमान (µ) नियत हों, अर्थात v ∝ √T, जब l तथा µ नियत हैं।

(iii) द्रव्यमान का नियम (Law of mass) –

तनी हुई डोरी के कंपन की आवृत्ति (v) डोरी के प्रति एकांक लंबाई के द्रव्यमान (µ) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यदि डोरी की लंबाई (l) और डोरी का तनाव (T) नियत हों, अर्थात v ∝ √1/µ जब l तथा T नियत हैं।

परंतु, µ = πd²ρ जहाँ d और ρ क्रमशः डोरी के व्यास तथा घनत्व हैं।

इस नियम के दो भाग संभव हैं—

(a) व्यास का नियम (Law of diameter) —

तनी हुई डोरी के कंपन की आवृत्ति (v), डोरी के व्यास (d) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यदि डोरी की लंबाई (I), डोरी का तनाव (T) और उसके पदार्थ का घनत्व ( ρ) नियत हों, अर्थात v ∝ 1/d जब I, T और ρ नियत हैं।

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(b) घनत्व का नियम (Law of density) –

तनी हुई डोरी के कंपन की आवृत्ति (v), डोरी के पदार्थ के घनत्व (ρ) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यदि डोरी की लंबाई (l), डोरी का तनाव (T) और उसका व्यास (d) नियत हों, अर्थात v ∝ 1 / √ρ जब I, T और d नियत हैं।

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Conclusion

दोस्तों हमारा Blog….”डोरियों का कंपन, तनी हुई डोरी के अनुप्रस्थ कंपन के नियम (Speed of Transverse Waves in Stretched String or Wire)”पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद उम्मीद करता हूं कि इस आर्टिकल में आपको अपने सभी सवालों के जवाब मिल गए होंगे, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल रह गया हो, तो आप हमसे Comments द्वारा पूछ सकते हैं.

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